BBT Africaअफ्रीका में श्रील प्रभुपाद की पुस्कों के मुद्रक एवं वितरक बी बी टी, अफ्रीका (भक्तिवेदांत बुक ट्रस्ट,अफ्रीका) की हाल ही में निकली रिपोर्ट में यह सुचना दी गयी की अफ्रीका में अब तक का सबसे अधिक पुस्तक वितरण २०१४ में हुआ ।
केन्या (८२,७५६ पुस्तकें) एवं दक्षिण अफ्रीका (६९,९२३ पुस्तकें) में सबसे अधिक पुस्तकें वितरित की गयी । इसके साथ ही मॉरिशस, घाना, नाइजीरिया, तंज़ानिया, टोगो, मलावी, कांगो, बोत्सवाना, ज़ाम्बिया, इत्यादि देशों में कुल मिलाकर २ लाख, २२ हज़ार, छः सौ नौ पुस्तकें वितरित की गयीं ।
५४ अफ्रीकन देशों में से सिर्फ १३ देशों के भक्तों ने इसमें भाग लिया और यह संख्या लगातार बढ़ रही है ।
श्रील प्रभुपाद की पुस्तकों को अफ्रीका में अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है । श्रील प्रभुपाद की शिक्षाओं के बारे में पर्चे बनाकर लोगों में बाँटे जा रहे हैं । “हरे कृष्ण जप”, “कर्म क्या है”, “हम शाकाहारी क्यों बनें” एवं “पुनर्जन्म” नामक शीर्षकों के पर्चे अरबी, हिन्दी , अंग्रेजी, फ्रेंच, ज़ुलु, क्शोसा, अफ्रीकी और चीनी भाषा में मुद्रित किये गए और सम्पूर्ण अफ्रीका की ६३% जनसँख्या को बांटे गए ।
श्रील प्रभुपाद की पुस्तको को अफ्रीका के कई पुस्तक विक्रेता दुकानों में भी रखा गया है ताकि अधिक से अधिक लोग इसका लाभ ले सकें ।
President of Zambia receives a copy of the Gita

ज़ाम्बिया के राष्ट्रपति भगवद-गीता यथारूप की एक प्रति ग्रहण करते हुए

शास्त्र-दान योजना के अंतर्गत अल-अखवायां विश्वविद्यालय के पुस्तकालय में भी श्रील प्रभुपाद की श्रीमद्-भागवतम एवं चैतन्य-चरितामृत सहित सारी पुस्तको का समूचा संग्रह रखा गया है ।
डरबन की रथयात्रा, जोकि भारत के बाहर सबसे बड़ी रथयात्राओं में से एक होती है, में श्रील प्रभुपाद की ५८ भाषाओँ में अनुवादित पुस्तकों का एक स्टाल लगा जिसमे १२ अफ्रीकन भाषाओं में पुस्तकें भी उपलब्ध थी । अगले वर्ष इस्कॉन के ५० वीं वर्षगाँठ पर ५,००,००० पुस्तके वितरण करने का लक्ष्य रखा गया है ।