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दामोदर मास के कृष्ण-पक्ष की अष्टमी को ब्रजवासियों द्वारा राधाकुण्ड का आविर्भाव दिवस मनाया जाता है । विशेषतः इस दिन राधाकुण्ड में स्नान किया जाता है, जिससे श्रीमती राधारानी की कृपा की कामना की जाती है और प्रतिफल में कृष्ण-कृपा मिलती है ।

राधाकुण्ड का प्राकट्य मध्यरात्रि में हुआ था । लोग प्रसाद, फूलमालाएं एवं फल-सब्जियां अर्पण करके राधाकुण्ड एवं श्यामकुंड में स्नान करते हैं । कई लोग नित्यानंद प्रभु की आह्लादिनी शक्ति, जाह्नवा माता के घाट पर स्नान करना पसंद करते हैं, परन्तु भीड़-भाड़ अधिक होने के कारण जहाँ भी जगह मिले वहीँ स्नान करना श्रेयस्कर होगा ।

“मथुरा की पवित्र भूमि को दिव्य वैकुण्ठ धाम से श्रेष्ठ कहा गया है, क्योंकि यहाँ पर भगवान अवतरित हुए । मथुरापुरी से श्रेष्ठ श्री वृन्दावन धाम के वन हैं क्योंकि वहां पर उन्होंने रास रचाया था । वृन्दावन से भी श्रेष्ठ गोवर्धन है क्योंकि श्री भगवान ने स्वयं अपने दिव्य हाथों से उसे उठाया था और वहां पर कई मधुर एवं दिव्य लीलाएं की । इन सबसे ऊपर, उत्कृष्ट और सर्वोत्तम है श्री राधाकुण्ड क्योंकि यह गोकुलाधिपति भगवान श्रीकृष्ण के प्रेमामृत से आप्लावित है। ऐसा कौन बुद्धिमान व्यक्ति होगा जो गोवर्धन की तलहटी में स्थित इस राधाकुण्ड में स्नान नहीं करना चाहेगा ?”

श्रील रूप गोस्वामी कृत, उपदेशामृत से

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