cosmic form image-1282105575623 universal_form_krishna

प्रश्न : क्या भगवान इतने बड़े हैं कि वे किसी चित्र के द्वारा दर्शाये नहीं जा सकते ? मेरा एक ईसाई मित्र है जो कहता है कि भगवान इतने महान एवं व्यापक हैं कि वे किसी चित्र द्वारा दर्शाये नहीं जा सकते । कम से कम इतने तो नहीं कि उनका चित्र हम जेब में ले कर घूम सकें ।

उत्तर : जी हाँ भगवान इतने महान एवं व्यापक हैं की हम उन्हें देख भी नहीं सकते मगर वे कितने भी महान क्यों न हों उनकी कृपा उनसे भी महान है । ये उनकी कृपा ही है कि जो हमारे दृष्टि से परे हैं वे भगवान स्वयं को विग्रह रूप में हमारे लिए सुलभ करते हैं । वे लोग जो एक तरफ तो कहते हैं कि भगवान इतने महान हैं कि किसी चित्र द्वारा दर्शाये नहीं जा सकते, भगवान की महत्ता को स्वीकारते हैं परन्तु ऐसे लोग उनकी महान कृपा को सीमित कर देते हैं । भगवान महान हैं इसलिए वे कुछ भी कर सकते हैं । और कुछ भी कर सकने का तात्पर्य ये है कि वे स्वयं को हमारी दृष्टि के समक्ष प्रकट भी कर सकते हैं ।

हाँ वे अनंत हैं और उसी अनंत का एक भाग हमारी सीमित दृष्टि के लिए अपने आप को सीमित रूप में प्रकट करता है । और एक सिमित रूप कैसे असीमित भगवान को प्रकट करता है यही उनकी शक्ति का प्रतीक है । हम सीमित जीव यह नहीं कर सकते । असीमित को सीमित में नहीं बाँधा जा सकता परन्तु भगवान अनंत होने के साथ साथ अनंत शक्ति और कृपा के स्वामी भी हैं और वे स्वयं को हमारे समक्ष सीमित रूप में प्रकट करते हुए भी असीमित रहते हैं । जिस प्रकार एक छोटा बालक हाथी के माथे को छूने का प्रयास करे तो वह नहीं छू पायेगा परन्तु अगर वह हाथी बैठकर अपना माथा आगे कर दे तो बालक सरलता से छू लेगा । उसी प्रकार हम जीवात्मा परम भगवान को जानने एवं प्रेम करने का प्रयास कर रहे हैं । परन्तु वे जीवात्मा की पहुँच से दूर हैं । इसलिए भगवान, विग्रह रूप में प्रकट होकर स्वयं को हमारे लिए सुलभ करते हैं ताकि हम उन्हें छू सकें, उनकी सेवा कर सकें और इस तरह उनके प्रति प्रेम उत्पन्न कर सकें ।

हमारी आँखें हमारी चेतना का प्रमुख प्रवेश द्वार हैं इसलिए अगर हम भगवान के प्रति समर्पित होना चाहते हैं तो हमें अपनी आँखों को भक्तिमय एवं आध्यात्मिक दिशा में निर्देशित करना होगा । भगवान के विग्रहों के द्वारा हम अपनी आँखों को निर्देशित करने में सक्षम हो पाते हैं । इस तरह वे असीमित भगवान कृपापूर्वक स्वयं को विग्रह रूप में प्रकट करके हमारे लिए सुलभ हो जाते हैं और उन विग्रहों के चित्रों को लेकर हम अपनी सीमित आँखों द्वारा भक्ति कर सकते हैं । इस प्रकार हम उनके निकट जाकर उनको पा सकते हैं ।
इस तरह भगवान की महत्ता एवं व्यापकता किसी चित्र द्वारा सिमित नहीं होती परन्तु वे सीमित रूप में प्रकट होकर भी अपनी असिमितता को प्रकट करते हैं । यही उनकी अनंत शक्ति और कृपा का द्योतक है ।

प्रेषक : ISKCON Desire Tree – हिंदी
hindi.iskcondesiretree.com
facebook.com/IDesireTreeHindi