ISKCON Bahrain Festival (4)

इस्कॉन के स्थापना की ५०वीं वर्षगाँठ के उपलक्ष्य में विश्व हरिनाम सप्ताह उत्सव (बहरीन)

इस्कॉन के स्थापना की ५०वीं वर्षगाँठ के उपलक्ष्य में विश्व हरिनाम सप्ताह उत्सव 

भगवान् श्री चैतन्य महाप्रभु द्वारा आरंभ किया गया हरिनाम संकीर्तन या भगवान् के पवित्र नामों का सामूहिक कीर्तन आज भी विश्वभर में बहुत ही वैभव एवं धूमधाम से निकाले जाने का प्रचलन है।
यद्यपि मध्य-पूर्वी देश धार्मिक कट्टरता के कारण इस विषय को लेकर तनिक संवेदनशील हैं इस कारण आज तक इन देशों में इस प्रकार से सड़कों पर भक्ति का लोक-प्रदर्शन या हरिनाम संकीर्तन नहीं हुआ था। बहरीन में यह विलक्षण कार्यक्रम वहां के प्रधानमंत्री माननीय युवराज ख़लीफ़ा बिन सलमान अल खलीफा के समर्थन द्वारा संभव हो सका ।
बहरीन के लगभग ५०,००० रहिवासियों ने इस कार्यक्रम में भाग लिया और लगभग २५० भक्तों ने मंच पर हरे कृष्ण कीर्तन करके भगवान् श्री चैतन्य की उस भविष्यवाणी को सत्य सिद्ध किया कि हरे कृष्ण महामंत्र विश्व के हर नगर एवं गाँवों में सुनाई देगा। साठ-सत्तर के दशक में विश्वभर में विख्यात बीटल्स बैंड द्वारा गाये हुए गीत से कार्यक्रम का आरम्भ हुआ । आशय यह था कि यही गीत श्रील प्रभुपाद के समय में कृष्ण भावनामृत आंदोलन को जन-जन तक पहुँचाने ने सहायक सिद्ध हुआ था।
ISKCON Bahrain Festival (1)मैदान में मुख्यतः हिंदी, अंग्रेजी एवं अरबी  भाषाओं, में बड़े बड़े अक्षरों में हरे कृष्ण महामंत्र के बैनर लगाए गए थे।
एकलव्य प्रभु ने माननीय युवराज खलीफा एवं संयोजकों का आभार प्रकट करते हुए कार्यक्रम की शुरुआत की।
तत्पश्चात उन्होंने इस्कॉन के विषय में लोगों को अवगत कराया। मंच पर भक्तगण तीन मृदंग, तीन करताल एवं सहगान करने हेतु गायक-वृन्द उपस्थित थे। सबसे आगे रंग-बिरंगे साड़ी और गोपिवेश में छोटी छोटी बालिकाएं मंच की शोभा बढ़ा रही थी। उत्सव में भाग लेने आये जन-साधारण के लिए इतनी अधिक मात्रा में एकत्रित हरे कृष्ण भक्तों का उत्साह देखना अचंभित करने वाला दृश्य था।
कीर्तन धीमे स्वर में प्रारम्भ हुआ और धीरे धीरे लय पकड़ता हुआ तीव्र होने लगा। जैसे जैसे कीर्तन की तीव्रता बढ़ती गयी श्रोताओं में बैठे हुए भक्तगण खड़े होकर नाचने लगे। सभी ने मिलकर हरे कृष्ण कीर्तन किया और इस कार्यक्रम को बहुत सराहा गया।
एकलव्य प्रभु ने कार्यक्रम के समापन पर हरे कृष्ण महामंत्र के विषय में संक्षिप्त में व्याख्या की और हरिनाम का महत्त्व बताया तदोपरांत माननीय खलीफा एवं संयोजकों को धन्यवाद दिया ।
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