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इस्कॉन के बड़े प्रचारकों में से एक परम पूज्य इन्द्रद्युम्न स्वामी मंगोलिया की द्वी-साप्ताहिक यात्रा पर हैं । वे यहाँ के नगरों एवं गावों में इतिहास का सबसे पहला हरिनाम संकीर्तन करने वाले हैं ।
मंगोलिया एक बहुत बड़ा देश है जो मुख्यतः रेगिस्तान, सपाट मैदान और पर्वतों से घिरा है । यहाँ की ५३% जनसँख्या बौद्ध धर्म की अनुयायी है और शेष खानाबदोश है ।
इस्कॉन के भक्त यहाँ पहली बार १९९० में आये थे और अब यहाँ की राजधानी उलांबटार में एक मंदिर भी है ।
इन्द्रद्युम्न स्वामी यहाँ ७ भक्तों के साथ आये हैं और थोड़ा घूमने के पश्चात इस्कॉन मंदिर में पहला उन्होंने अपना पहला कार्यक्रम किया ।
कार्यक्रम के समय स्थानीय वेशभूषा पहने इन्द्रद्युम्न स्वामी ने कहा की यहाँ के लोग बहुत ही जिज्ञासु एवं मैत्रीपूर्ण व्यवहार वाले हैं ।
मंगोलिया इस्कॉन मंदिर के अध्यक्ष बताते हैं कि अगर आप यहाँ की वेशभूषा पहनते हैं तो सरकार आपकी बहुत सहायता करेगी और स्थानीय लोग भी आपके सन्देश को गंभीरता से सुनेंगे ।
उलांबटार के बाद भक्त खरकोरिन की ओर गए जोकि मंगोलिया की पुरानी राजधानी है । वहां के सबसे बड़े बौद्ध आश्रम में मठाधीश द्वारा अनुरोध करने पर बड़ा हरिदास प्रभु ने हरे कृष्ण कीर्तन किया । इन्द्रद्युम्न महाराज ने उन्हें भगवद-गीता यथारूप भी भेंट की ।
शाम को एक बड़े हॉल में कीर्तन और नृत्य हुआ जिसमे कई खरकोरिन निवासियों ने हर्षोल्लास के साथ भाग लिया ।
उसके बाद अगले दिन, प्रातः भक्तों ने गोबी रेगिस्तान के एक नगर सैंशांद में मृदंग, करतालों सहित संकीर्तन निकाला, जो सभी नगरवासियों ने पसंद किया ।
इसी तरह कई नगरों एवं गावों में संकीर्तन निकाले गए । पूर्व में इस्कॉन के भक्तों को इस तरह से सार्वजानिक कार्यक्रम करने की अनुमति नहीं थी परन्तु अब सभी लोग इसमें भाग ले रहे हैं । चैतन्य महाप्रभु की इच्छानुसार हरिनाम संकीर्तन हर गाँव और नगर में हो रहा है ।