Vanity Karma

इस्कॉन के वरिष्ठ गुरु एवं सन्यासी प पु जय अद्वैत स्वामी द्वारा रचित नई पुस्तक “वैनिटी कर्म” को एक स्वतंत्र पुस्तक प्रकाशन संगठन द्वारा २०१६ बेंजामिन फ्रेंक्लिन पुरस्कार प्रदान किया गया।

भक्तिवेदांत बुक ट्रस्ट द्वारा प्रकाशित इस पुस्तक को इस वर्ष की “धार्मिक” श्रेणी में सर्वोत्तम पुस्तक चुना गया। 

यह पुरस्कार, साल्ट लेक सिटी, उटाह में हुए २८वें वार्षिक आईबीपीए प्रकाशन विश्विद्यालय द्वारा प्रदान किया गया था।

इस पुस्तक में दो अत्यन्त गम्भीर मूलग्रन्थों का अन्वेषण किया गया है। एक बाइबिल के ‘ओल्ड टेस्टामेंट’ में से एवं दूसरा भगवान् कृष्ण के अर्जुन को कहे हुए शब्दों से ।

जय अद्वैत स्वामी महाराज के लिए दोनों अत्यन्त महत्वपूर्ण हैं । बाइबिल की शिक्षाओं ने उन्हें उस मार्ग पर अग्रसर किया जो भगवद्-गीता तक जाता था। उन्हें आशा है कि ‘वैनिटी कर्म’ नामक इस पुस्तक में उनके अन्वेषण द्वारा अन्य लोगों को अपनी अध्यात्मिक यात्रा सहज बनाने में सहायता मिलेगी।

३८४ पन्नों की यह पुस्तक बहुत सारे विद्वानों एवं साधारण पाठकों से प्रसंशात्मक समीक्षाएँ बटोर चुकी है।

हूस्टन विश्वविद्यालय में सामाज-शास्त्र  के प्राध्यापक हेलेन रोज़ एबऑ कहते हैं, ‘वैनिटी कर्म’ सदियों से मानव समाज द्वारा पूछे जाने वाले गहन प्रश्नों को उठाती है, जैसे “हम पृथ्वी पर क्यों हैं, हमारे अस्तित्व का वास्तविक अर्थ क्या है?” 

वे कहते हैं, “स्वामी जी ने बाइबिल द्वारा उठाये गए प्रश्नों का भगवद-गीता की विषयवस्तुओं द्वारा उत्तर दिया है।”

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