मुझे यह जानकर हर्ष हुआ कि आपने अपने मन पर पुनः नियंत्रण पा लिया है तथा माया के सारे दांव अब समाप्त हो गए हैं । भगवान कृष्ण कि कृपा द्वारा आप माया के आक्रमण से बचा लिए गए हैं ।

आप बाल-बाल बचे हैं और इस से आपको अच्छी सीख लेनी चाहिए कि यदि हम कठोरता से नियामक सिद्धांतों का पालन नहीं करते तो माया अपने प्रभाव से शंका उत्पन्न करके भगवान कृष्ण में हमारी श्रद्धा को दुर्बल कर देने के लिए सदैव तत्पर है ।

अतएव मैं बहुत प्रसन्न हूँ की आप बच गए हैं और मैं आपकी रक्षा के लिए भगवान कृष्ण से प्रार्थना कर रहा था ।

– श्रील प्रभुपाद
मधुसूदन को पत्र, लॉस एंजेलेस, ३० जनवरी १९७०