कृष्ण-अर्जुन मंदिर, अलीगढ़

भगवान श्री कृष्ण ने श्रील प्रभुपाद के द्वारा अपनी अहैतुकी कृपा सृष्टि के कोने कोने तक पहुचाई. श्रील प्रभुपाद ने फ्रांस में नव मायापुर बनाया, अमरीका में नव वृन्दावन बनाया; और अब बारी थी अलीगढ को ‘हरिगढ़’ बनाने की.
भगवान श्री हरी ने अपने प्रतिनिधि परम पूज्य श्री क्रतु जी महाराज को यह अति मंगल कार्य करने और श्री चैतन्य महाप्रभु और श्रील प्रभुपाद की भविष्यवाणी,  ‘हर गाव, हर गली में हरिनाम होगा’ – इन शब्दों सत्य सिद्ध करने भेजा |
दयालु श्याम ने यह भी निश्चय किया की वह एक और जीवात्मा को इस दिव्य आयोजन का भाग बनाये. भगवान कृष्ण ने उन्हें वह माध्यम बनाया जिनके द्वारा ISKCON को मंदिर बनाने की भूमि प्राप्त हो सकी | यह महान आत्मा है डॉ. वार्ष्णेय, जिनकी श्रील प्रभुपाद की भांति यह गहन इच्छा थी की उनकी वह इस भूमि को वैदिक, विशेषकर श्रीमद भगवद गीता के पठन – पाठन, के लिए एक स्थल बना सके |  और इसी कारण से इस मंदिर को नाम मिला ‘श्री गीता ज्ञान मंदिर’.
इस मंदिर ले लिए भूमि पूजन १३ नवम्बर २०१५ को परम पूज्य श्री गोपाल कृष्ण गोस्वामी महाराज, परम पूज्य श्री नव योगेन्द्र स्वामी महाराज और स्वयं परम पूज्य श्री क्रतु महाराज की दिव्य उपस्थिति में हुआ था | इस मंदिर के प्रथम चरण का उद्घाटन ३० नवम्बर २०१७ को हुआ |  इस दिन की तैयारियां करीब एक वर्ष पूर्व प्रारंभ हो गयी थी, जब परम पूज्य क्रतु महाराज ने यह घोषित किया था की यह शुभ उद्घाटन मोक्षदा एकादशी, श्री गीता जयंती के पवन पर्व पर होगा |  जैसा की क्रतु महाराज और उनके शिष्यों ने अनुमान किया था, इस उद्घाटन की साक्षी बनने लगभग १०,००० भक्तगण दिल्ली, वृन्दावन एवं अलीगढ से एकत्रित हुए |  आखिर होते भी क्यों न, यह कोई आम उत्सव नहीं, स्वयं कृष्ण अर्जुन का आगमन उत्सव था | एक ही साथ १३ यज्ञ स्थलियों पर यज्ञ कर के तथा ISKCON वृन्दावन के गुरुकुल के छात्रों द्वारा सम्पूर्ण भगवद गीता के श्लोको का सुन्दर तरीके से उच्चारण कर के ‘गीता यज्ञ’ को इस दिन पर संपन्न किया गया | सबसे अधिक प्रतीक्षित श्रील प्रभुपाद और श्री कृष्ण-अर्जुन के सबसे विरले दर्शन और उनका अभिषेक मंदिर के हॉल में सम्पूरित हुआ | क्रतु महाराज के शिष्य तथा उद्घाटन में शामिल हो रहे अन्य भक्तों ने इस दिन १२ घंटे लगातार कीर्तन किया | क्रतु महाराज जी के शिष्यों द्वारा पूरी भगवद गीता की कथा बाहर आँगन में उच्चारित हो रही थी, जिसके पश्चात् उनके युवा शिष्य, IYF-C2C द्वारा कुछ रोमांचक सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुति की गयी |
श्रील प्रभुपाद के दो और शिष्य – परम पूज्य दीनबंधू प्रभु तथा परम पूज्य दधि भक्ष प्रभु ने इस दिन की श्रेष्ठता और बढ़ाई | कुछ महान व्यक्तित्व जिन्होंने इस दिन की शोभा बढाई, वह थे, परम पूज्य भक्तिअनुग्रह जनार्दन स्वामी महाराज वृन्दावन से, आदरणीय मोहन रूपा प्रभु- ISKCON दिल्ली के अध्यक्ष और आदरणीय कृष्ण भक्त प्रभु- ISKCON नॉएडा के अध्यक्ष |
पूरे दिन लगातार आने वाले भक्तों को एकादशी प्रसाद बांटा गया | दधिभक्ष प्रभु ने कहा ‘कार्यक्रम बहुत अच्छे से नियोजित अथवा संचालित था’ | पेरू से आने वाले एक और भक्त ने कहा की कार्यक्रम सर्व श्रेष्ठ तथा प्रसादम बहुत स्वादिष्ट था | उन्होंने ऐसा भी कहा की उन्होने आज तक ऐसे कृष्ण-अर्जुन के दर्शन कभी नहीं किये है |
यह आदरणीय रसराज प्रभु, ISKCON अलीगढ के अध्यक्ष, के लिए एक आनंदमय दिन था जो कई वर्षो से इस शुभ कार्यक्रम को सफल बनाने का प्रयास कर रहे थे |
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इस्कॉन अलीगढ़ उद्घाटन फोटो