“हमारा प्रचार कीर्तन तथा ग्रन्थ, पुस्तक और पत्रिकाओं के वितरण को प्रसारित करने पर केंद्रित होना चाहिए | अभी इस प्रक्रिया का अनुभव यह हुआ है कि कीर्तन के उपरांत वे सफलतापूर्वक पत्रिकाओं और पुस्तकों का वितरण कर पा रहे हैं |”
– श्रील प्रभुपाद का ब्रह्मानंद को पत्र, ३० जनवरी १९६९
गत ११ फ़रवरी को सूरत (गुजरात) के पर्वत-पाटिया क्षेत्र में आयोजित भगवान श्री जगन्नाथ जी की रथयात्रा में परम पूज्य भक्ति विकास स्वामी महाराज के दिव्य कीर्तन और नृत्य से वहां के रहिवासियों के मध्य अनंत उत्साह एवं उन्माद की लहर दौड़ गयी | इस क्षेत्र के लोग कमलनयन श्री जगन्नाथ के प्रथम दर्शन पा कर उन्मत्त हो उठे | यह रथयात्रा बीस आवासीय सोसाइटी के मध्य से होते हुए लगभग तीन घंटे चली | इसमें भाग लेने वाले भक्तों ने हर दिशा में, घर घर जाकर लोगों को श्रील प्रभुपाद की पुस्तकों से अवगत कराया और लोगों ने भी दिल खोल श्रील प्रभुपाद की पुस्तकों को स्वीकार किया | तीन घंटों के अंतराल में अद्भुत पुस्तक-वितरण स्कोर इस प्रकार रहा:

१४० – बड़ी पुस्तकें
१५० – मध्यम पुस्तकें
३५० – छोटी पुस्तकें
२ सेट – श्री चैतन्य चरितामृत
१ सेट – श्री भक्तिसिद्धांत वैभव
१०० – भगवद्दर्शन पत्रिका
 
रथयात्रा तथा पुस्तक-वितरण से सम्बंधित फोटो यहाँ देखें : https://photos.app.goo.gl/239ggXMX27WQ5m1Y2
इस रथयात्रा तथा पुस्तक-वितरण कार्यक्रम का प्रबंधन श्रीमान राधेश प्रभु तथा श्रीमान अरविंदाक्ष प्रभु की अध्यक्षता में हुआ |
श्रील प्रभुपाद के दिव्य पुस्तक-वितरण की सदा ही जय हो |

– आपका दीन सेवक
जगन्नाथ दामोदर दास (इस्कॉन सूरत की ओर से)