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कुछ इस्कॉन मंदिर इस वर्ष के राधाष्टमी महोत्सव सहित अपने बड़े समारोह में नए अनुभवों को जोड़ रहे हैं, जिस से भक्त और भी मधुरता और गहरी तन्मयता से भगवान की सेवा संलग्न हो सकें।

अमरीका के डल्लास प्रांत में इस वर्ष दो राधाष्टमी मनाई गयी, दोनों अपने आप में अद्वितीय थी।

वास्तविक राधाष्टमी ०९ सितम्बर, २०१६ शुक्रवार के दिन, भक्तों ने पुष्प अभिषेक में श्री श्री राधा कालाचाँदजी को अविश्वसनीय ५०००० गुलाबों से स्नान कराया।

पुजारी नित्यानंद चंद्र दास ने बताया कि “गुलाब की पंखुड़ी निकालने और उन्हें संगृहीत करने की तैयारी में भक्तों को चार दिन लग गए।”
राधाष्टमी के दिन, प पु केशव भारती स्वामी महाराज द्वारा प्रवचन और भक्तों द्वारा नियमित रूप से आधे घंटे तक बिना रुके लगातार गुलाब के पुष्पों के झरने की वर्षा से विग्रहों को अभिषेक स्नान कराया गया तथा चित्ताकर्षक आनंदमय कीर्तन से वातावरण भक्तिमय बन गया।
श्रीमान नित्यानंद चंद्र दास ने कहा कि “भगवान के कंठ तक तीन बार गुलाब के पुष्पों का पर्वत सा बन गया और प्रत्येक बार हमें उन पुष्पों को निकलना पड़ता था जिस से हम और भी पुष्प अर्पण कर सकें।”
जब सभी गुलाब के पुष्प श्री श्री राधा कालाचाँद जी को अर्पण हो गए, तब उन पुष्पों को वेदी से निकालकर चक्र में घूमकर आनंदमय नृत्य तथा अपने ह्रदय से भगवान के नामों का उच्चारण कर रहे भक्तों पर बरसाया गया।
नित्यानंद बताते हैं कि “यह इतना था कि आप मंदिर के फर्श को नहीं देख सकते थे, क्योंकि समूचा फर्श गुलाब के पुष्पों की कुछ इंच मोटी कालीन से प्रच्छन्न हो गयी थी।”
जो राधाष्टमी के दिन शुक्रवार को अपने कार्य के कारण उत्सव में शामिल न हो सके उनके लिए इसी बीच रविवार को नौका विहार के विशेष समारोह के साथ पूर्ण राधाष्टमी महोत्सव मनाया गया।
भक्तों ने पहले श्री श्री राधा कालाचाँद जी के छोटे विग्रहों को मंदिर में हंस रुपी नौका पर स्थापित किया और फिर पंक्ति से पुष्पों को विग्रहों के चरण कमलों में अर्पित किया।
तत्पश्चात भगवान को नौका पर छोटे परिक्रमा के लिए मंदिर के निकट कालाचाँद जी उद्यान ले जाया गया, जहां बड़ा तालाब बनाया गया था।

वहां प पु ऋतद्विज स्वामी महाराज ने आरती की, फिर विग्रहों को दो घंटे के नौका विहार समारोह में एक सौ बार तालाब का परिक्रमा कराया गया।
नित्यानंद चंद्र दास ने आगे बताया कि “सभी भक्तों को रस्सी खींच कर श्री श्री राधा कालाचाँद जी को नौका विहार कराने तथा छोटी आरती, धूप और पुष्प अर्पण करने का अवसर प्राप्त हुआ।”
नौका विहार के पश्चात, भगवान को पुनः मंदिर ले जाया गया और भक्तों को अपने उत्सव वस्त्र के साथ एक-दूसरे पर आनंदपूर्वक गुलाब के पुष्पों और पानी छिड़कने के लिए तालाब में आने का आमंत्रण दिया गया।

नित्यानद चंद्र ने फिर कहा कि “यह बहुत मजेदार था, पूरे देश से २०० भक्त शुक्रवार को और ३०० रविवार को आये। इस प्रकार के उत्सवपूर्ण वातावरण द्वारा भक्त योजना बनाने, प्रस्तुत करने साथ ही साथ भविष्य दोबारा इस प्रकार के उत्सव करने के विषय में सोचकर विशेष प्रकार से कृष्ण की सेवा के प्रति ध्यान मग्न रहते हैं।
हरे कृष्ण।
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