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दो साहसी एवं खोजी भक्तों ने विश्व के दक्षिणतम छोर, अति-शीत अंटार्कटिक महाद्वीप पर श्रील प्रभुपाद की पुस्तकों का वितरण और हरिनाम संकीर्तन करने का मन बनाया है ।

इस महाद्वीप का ९८ प्रतिशत भाग बर्फ से ढका हुआ है परंतु यहाँ पर भी पर्यटकों का आना-जाना लगा रहता है तथा यहाँ पर कई अंतराष्ट्रीय अनुसन्धान केंद्र भी हैं ।

वे दो भक्त जो इस साहसिक कार्य को करने जा रहे हैं उनका परिचय इस प्रकार है :
केशीहंता दास – वे श्रील प्रभुपाद के शिष्य हैं और इस्कॉन आलचुआ की गोरक्षा योजना के सह-निदेशक भी हैं ।
त्रिविक्रम दास – वे एक वैष्णव बैंड – १०८ – में संगीत-कलाकार हैं ।

उन्हें यह प्रेरणा तब मिली जब बॉस्टन में श्रील प्रभुपाद के आगमन की ५०वीं वर्षगाँठ मनाते समय भक्त उनकी उपलब्धियों की चर्चा कर रहे थे और एक भक्त ने कहा कि विश्व के ६ महाद्वीपों में श्रील प्रभुपाद की कृपा पहुँच चुकी है । तभी उनके मन में यह आया कि सातवां महाद्वीप क्यों नहीं ?

केशीहंता कहते हैं, “मेरे ख्याल से आज तक कोई भक्त अंटार्कटिक नहीं गया होगा । इसलिए किसी और के पहुँचने से पहले हम पहुंचना चाहते थे ।”iskcon-antarctica1

दोनों भक्त अजेंटीना के शहर उशुआइआ से, एक ८८ यात्रियों वाले एक जलपोत से दो दिन की यात्रा करते हुए अंटार्कटिक पहुंचेंगे ।

वे श्रील प्रभुपाद के एक विग्रह को भी साथ ले जा रहे हैं जिसकी वे आरती करते हुए जायेंगे । उनके लिए इस यात्रा में होने वाली कठिनाइयां या ख़राब मौसम श्रील प्रभुपाद की यात्रा की याद दिलाने वाला होगा, जो उन्होंने अमेरिका आते समय जलदूत नामक जहाज पर अनुभव किया था ।

अंटार्कटिक में शीत ऋतू का तापमान शून्य से ८९ °C से नीचे चला जाता है तथा तेज़ ठंडी हवाएं चलती हैं । सौभाग्य से नवम्बर में यह गर्मी का मौसम होता है और तापमान शून्य से एक या दो डिग्री कम रहता है और बर्फ जमी रहती है । ऐसी दशा में वे श्री कृष्ण एवं श्रील प्रभुपाद की वाणी का प्रचार-प्रसार करना चाहते हैं ।

उन्होंने वहां के अनुसन्धान केंद्र में कार्यरत एक व्यक्ति से संपर्क बनाया हुआ है जो श्रील प्रभुपाद की भगवद-गीता को वहां के तीन बड़े पुस्तकालयों में रखना स्वीकार कर चुका है । ये बड़े केंद्र हैं : दक्षिणी ध्रुव पर अमुंडसेन-स्कॉट, सबसे बड़ा मेक्मुद्रो केंद्र और पामर केंद्र । उन्होंने व्यक्तिगत रूप से ब्रिटेन, अर्जेंटीना, और यूक्रेन के अनुसन्धान केंद्रों में श्रील प्रभुपाद की भगवद-गीता की एक एक प्रति रखवाने की योजना बनाई है । इसके लिए वे यूक्रेनी भाषा में भगवद-गीता की प्रति भी लेकर गए हैं ।

वे अंटार्कटिक द्वीप पर कीर्तन भी करने की योजना बना रहे हैं जिसमे सह-यात्रियों के भाग लेने की सम्भावना है । एक कीर्तन के दौरान वे श्रील प्रभुपाद की गुरु-पूजा आरती भी करेंगे ।

गर्मी के मौसम में लगभग ४००० अनुसन्धानकर्ता एवं वैज्ञानिक यहाँ रहते हैं । कई पर्यटक भी इस मौसम में यहाँ आते हैं । एक बार कृष्ण भक्ति के कार्यक्रम यहाँ प्रारम्भ होने से हर वर्ष इसको बढ़ाया जा सकता है । योजनाएं तो हैं परंतु ५०वीं वर्षगाँठ के उपलक्ष्य में श्रील प्रभुपाद की नए नए स्थानों पर हरिनाम पहुँचाने की इच्छा पूरी होते हुए दिख रही है । यह इन भक्तों की ओर से श्रील प्रभुपाद को सप्रेम भेंट है ।