॥ पहला दिन : अहंकारी हिरण्यकशिपु का नम्र किंतु दृढ़ प्रह्लाद से आमना-सामना ॥

॥ दूसरा दिन : दमनकारी एवं पापी हिरण्यकशिपु ॥

॥ तीसरा दिन : भगवान के विभिन्न अवतारों का आधारभूत एवं मूल कारण उनका प्रेम है ॥